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उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद : व्हाट्सऐप पर ‘खनन उगाही’ के फर्जी मैसेज वायरल, विभाग की छवि खराब करने की साजिश? दो नंबरों पर मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद राघवेंद्र सिंह खनन अधिकारी मुरादाबाद

मुरादाबाद में खनन विभाग को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक संदेशों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। विभाग की साख को नुकसान पहुंचाने और उसके नाम पर अवैध वसूली की आशंका के बीच मामला अब पुलिस जांच तक पहुंच गया है। जिला मुख्यालय स्थित खनन विभाग के प्रभारी अधिकारी राघवेन्द्र सिंह ने थाना सिविल लाइंस में तहरीर देकर कुछ अज्ञात लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।तहरीर के अनुसार, ट्रांसपोर्टरों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से ऐसे संदेश प्रसारित किए गए, जिनमें खनन विभाग पर कथित मनमानी वसूली और दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए गए। इन संदेशों के वायरल होने के बाद परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई ट्रांसपोर्टरों ने इन संदेशों को लेकर आपस में चर्चा शुरू कर दी, जिससे माहौल में अविश्वास फैलने लगा।

तहरीर के अनुसार, ट्रांसपोर्टरों के व्हाट्सऐप ग्रुपों में दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से ऐसे संदेश प्रसारित किए गए, जिनमें खनन विभाग पर कथित मनमानी वसूली और दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए गए। इन संदेशों के वायरल होने के बाद परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई ट्रांसपोर्टरों ने इन संदेशों को लेकर आपस में चर्चा शुरू कर दी, जिससे माहौल में अविश्वास फैलने लगा।राघवेन्द्र सिंह का कहना है कि यह एक सुनियोजित प्रयास हो सकता है, जिसका उद्देश्य विभाग की छवि को धूमिल करना है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ शरारती तत्व विभाग का नाम लेकर ट्रांसपोर्टरों से अवैध धन उगाही करने की कोशिश कर सकते हैं। उनके अनुसार खनन विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप है। ऐसे में इस तरह के संदेश न केवल विभाग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था के प्रति भी गलत धारणा पैदा कर सकते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल लाइंस थाना प्रभारी निरीक्षक मनीष सक्सेना ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया। जिन दो मोबाइल नंबरों से संदेश प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है, उन्हें एफआईआर में दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती स्तर पर इन नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और डिजिटल गतिविधियों की तकनीकी जांच कराई जा रही है।इंस्पेक्टर मनीष सक्सेना ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला साइबर माध्यम से अफवाह फैलाने और किसी सरकारी विभाग की छवि खराब करने से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच साइबर सेल को सौंप दी गई है, ताकि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने या किसी विभाग को बदनाम करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और पूरी पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल दोनों संदिग्ध मोबाइल नंबरों के संचालकों की तलाश जारी है।इस बीच ट्रांसपोर्टरों से अपील की गई है कि वे किसी भी अप्रमाणित संदेश पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति खनन विभाग के नाम पर धन की मांग करता है या दबाव बनाता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक संदेश कितनी तेजी से भ्रम और तनाव पैदा कर सकता है, और क्यों डिजिटल सतर्कता आज कानून-व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी है।

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