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गाजा संकट पर 26 देशों का समूह इजरायल के खिलाफ एकजुट, इन दो देशों ने बनाई दूरी

गाजा संकट पर 26 देशों का समूह इजरायल के खिलाफ एकजुट, इन दो देशों ने बनाई दूरी

गाजा पर पूर्ण कब्जे की नीयत से इजरायल ने अब कमर कस ली है। इजरायली फौज ने गाजा के उन इलाकों को भी खाली कराना शुरू कर दिया है, जहां लोगों ने हमले के डर से शरण ली है। इस बीच ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत 26 देशों ने मंगलवार को इजरायल को चेतावनी दी और कहा कि गाजा का दर्द अकल्पनीय है और हमारी आंखों के सामने अकाल फैल रहा है।

इन 26 देशों में सिर्फ दो यूरोपीय देशों जर्मनी और हंगरी ने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए।

यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने इजरायल को दो टूक कहा, “हमारी आंखों के सामने अकाल फैल रहा है। भूख को रोकने और हालात सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।”

इजरायल को चेतावनी

संयुक्त बयान में इजरायली सरकार से सभी अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की सहायता सामग्री के प्रवेश की अनुमति देने और ज़रूरी मानवीय कर्मियों को काम करने से रोकने वाले अवरोध हटाने की मांग की गई। इसमें कहा गया, “गाज़ा में भोजन, पोषण सामग्री, आश्रय, ईंधन, साफ पानी, दवाएं और चिकित्सीय उपकरण पहुंचाने के लिए सभी मार्ग और बॉर्डर क्रॉसिंग खोलने होंगे।”

इजरायल क्या कह रहा

दूसरी ओर इजरायल ने भूख फैलाने के आरोप से इनकार किया है और कहा है कि हमास सहायता सामग्री चुरा रहा है, जिसे हमास ने खारिज किया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के बाद इस्राइल ने हाल में कुछ कदम उठाए हैं, जैसे दिन के कुछ हिस्सों में लड़ाई रोकना और सहायता काफिलों के लिए सुरक्षित रास्ते तय करना।

इजरायल के खिलाफ ये देश एकजुट

पश्चिमी देशों का कहना है कि ये कदम नाकाफी हैं और उन्होंने गाज़ा में हवाई मदद भेजनी भी शुरू कर दी है। संयुक्त बयान पर ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, साइप्रस, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आइसलैंड, आयरलैंड, जापान, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। बाद में इटली और लातविया ने भी इस पर सहमति जताई।

यूरोपीय संघ (EU) की विदेश नीति प्रमुख काजा काल्लास और यूरोपीय आयोग के दो अन्य सदस्य भी इस बयान में शामिल हुए। हालांकि जर्मनी और हंगरी जैसे कुछ EU सदस्य देशों ने बयान में हस्ताक्षर नहीं किए।

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