एडवोकेट सुधीर चौहान ने की संयुक्त किसान मोर्चा की पंचायत में गन्ना कंट्रोल ऑर्डर के पालन की मांगभुगतान न होने पर केंद्र किराया वसूली पर रोक की उठी आवाजसीएसआर फंड सार्वजनिक करने व 15 क्विंटल चीनी देने की मांगगढ़मुक्तेश्वर संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ के आह्वान पर सिंभावली चीनी मिल क्षेत्र में आयोजित किसान पंचायत में गन्ना भुगतान, गन्ना कंट्रोल ऑर्डर और सीएसआर फंड को लेकर जमकर नाराजगी जताई गई। पंचायत में मोर्चा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं तथा क्षेत्र के हजारों किसानों ने भाग लिया।पंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि गन्ना कंट्रोल ऑर्डर के अनुसार यदि कोई चीनी मिल 14 दिन के भीतर किसानों को गन्ना भुगतान नहीं करती है, तो वह गन्ना क्रय केंद्र का किराया वसूलने की अधिकारी नहीं है। आरोप लगाया गया कि सिंभावली चीनी मिल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।किसान नेताओं ने कहा कि माननीय हाईकोर्ट द्वारा बैंक के माध्यम से आईआरपी नियुक्त किए जाने के बावजूद किसानों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। आरोप है कि मिल प्रशासन और आईआरपी की मिलीभगत से किसानों का शोषण जारी है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक मिल प्रबंधन के भ्रष्ट अधिकारियों को हटाया नहीं जाएगा, तब तक किसानों को न समय पर भुगतान मिलेगा और न ही ब्याज।संयुक्त किसान मोर्चा हापुड़ ने मांग की कि सिंभावली चीनी मिल द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत वर्ष 2013 से 2025 तक खर्च की गई धनराशि का पूरा ब्यौरा मिल प्रबंधन एवं बैंक के आईआरपी द्वारा किसानों के बीच सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही मोर्चा ने जिला अधिकारी हापुड़, जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना आयुक्त लखनऊ, मिल प्रशासन तथा बैंक के आईआरपी से मांग की कि इस मिल से जुड़े प्रत्येक किसान को हर पेराई सत्र में 15 क्विंटल चीनी दी जाए।किसान नेताओं ने यह भी मांग उठाई कि गन्ना आयुक्त लखनऊ, जिला अधिकारी हापुड़ एवं जिला गन्ना अधिकारी स्पष्ट रूप से लिखित में बताएं कि गन्ना कंट्रोल ऑर्डर 1966 सही है या गलत। यदि आदेश सही है, तो उसके अनुसार गन्ना मूल्य व ब्याज का समय पर भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। पंचायत के दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




