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मुरादाबाद आवारा कुत्तों का आतंक बेकाबू, 4 साल की मासूम की मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम

मुरादाबाद : जिले में आवारा कुत्तों का आतंक अब जानलेवा महामारी का रूप ले चुका है। डिलारी थाना क्षेत्र के काजीपुरा गांव में 4 साल की मासूम नूरसद को नोच-नोचकर मार डालने वाली दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। यह कोई इकलौती वारदात नहीं, बल्कि उस भयावह सच्चाई की झलक है, जो लंबे समय से लोगों की जिंदगी पर मंडरा रही है।सूत्रों के अनुसार: 600 से ज्यादा हमले, सैकड़ों घायलसूत्रों के अनुसार अब तक आवारा कुत्तों द्वारा करीब 600 लोगों पर हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कई पीड़ितों को लंबे इलाज से गुजरना पड़ा, जबकि कुछ आज भी जख्मों और डर के साए में जी रहे हैं। बावजूद इसके हालात जस के तस बने हुए हैं।खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गई मासूमसोमवार देर शाम घर के बाहर खेल रही 4 साल की नूरसद पर 5 से 6 आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। अन्य बच्चे जान बचाकर भाग निकले, लेकिन मासूम वहीं फंस गई। कुत्तों ने उसे घसीटते हुए गांव के तालाब के किनारे ले जाकर बेरहमी से नोच डाला। जब परिजन तलाश करते हुए पहुंचे, तब तक कुत्ते उसके शरीर के हिस्सों को खा रहे थे। चारों ओर खून फैला था। मंजर इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप उठी।गांव में मातम, बच्चों को घरों में कैद कर रहे माता-पिताइस दर्दनाक घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर निकालने से डर रहे हैं। स्कूल जाना, खेलना, बाजार जाना हर कदम पर मौत का डर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा कुत्तों के झुंड दिन-दहाड़े गलियों में घूमते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।प्रशासन पर सवाल: कितनी और जानें जाएंगी?सबसे बड़ा सवाल यह है कि 600 हमलों के बाद भी प्रशासन क्यों खामोश है? आखिर कितनी मासूम जिंदगियां जाएंगी, तब जाकर ठोस कार्रवाई होगी? नसबंदी, पकड़-धकड़ और सुरक्षित शेल्टर जैसी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित क्यों हैं?ग्रामीणों का आक्रोश, चेतावनी के सुरग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही आवारा कुत्तों से निजात नहीं दिलाई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। यह सिर्फ एक गांव या एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे जिले की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बन चुका है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस खौफनाक मौत से सबक लेता है या फिर मुरादाबाद के गांव-शहर यूं ही आवारा कुत्तों के आतंक के हवाले रहेंगे।सीएमओ से संपर्क का प्रयासजब इस मामले को लेकर जिला चिकित्सालय के सीएमओ से आवारा कुत्तों द्वारा लोगों और बच्चों पर हुए जानलेवा हमलों के संबंध में बातचीत करने का प्रयास किया गया, तो सीएमओ के नंबर पर कॉल की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई।

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