(रिपोर्टर भूपेंद्र वर्मा)
जनपद की तहसील गढ़मुक्तेश्वर/ सिंभावली क्षेत्र में नाम चिन्ह मिठाई की दुकानों पर खुलेआम सिंथेटिक मावे से तैयार दूषित मिठाईयां बिक्री की जा रही है। और संबंधित विभागीय अधिकारी हल्कान बने हुए हैं।
आपको बता दें कि बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गांव रझैटी सिंथेटिक मावे से तैयार बंगाली रसगुल्ला, बर्फी,मिल्क केक,इत्यादि मिठाइयां बनाने को लेकर दूर-दूर तक मशहूर है। और दुकानदार यहां से सस्ते दामों में खरीद कर इन मिठाइयों को अमरोहा,गजरौला, रामपुर,मुरादाबाद बरेली,हापुड़, गाजियाबाद,दिल्ली, मेरठ ,जैसे शहरों में ब्रांडेड नाम चिन्ह दुकानों पर रखकर अपने-अपने मार्का के डिब्बों में पैक कर धड़ल्ले से खुलेआम जनता जनार्दन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए बिक्री कर मोटा मुनाफा कमाने में मशगूल है। जिसका उदाहरण गत दिनों सिंभावली क्षेत्र में देखने को मिला था।
जिसमें तत्कालीन एसडीएम के दिशा निर्देश पर खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए हरियाणा नंबर की कार में भारी सिंथेटिक मिठाइयां जो कि दुकानों पर सप्लाई होने के लिए जा रही थी। उन्हें पड़कर कार्यवाही की गई थी। लेकिन सिंथेटिक मावे से मिठाइयों को तैयार करने का यह गोरख धंधा लगातार जारी है। जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिससे स्पष्ट होता है कि इन मिठाइयों की कालाबाजारी लग्जरी गाड़ियों से भी की जाती है।
सूत्रों की माने तो यहां पर यह कहावत चरितार्थ होती है कि सैया भाई कोतवाल तो डर काहे का, क्षेत्रीय खादय निरीक्षक के द्वारा सिंथेटिक मावे, दूध,दही पनीर,घी,के कारोबार से जुड़े कारोबारियों से वसूली करने को लेकर प्राइवेट व्यक्ति रखा हुआ है। जो प्रत्येक माह वसूली कर संबंधित विभागीय अधिकारियों की आंखों पर चांदी का चश्मा पहना देता है। फिर उसकी चमक में संबंधित विभागीय अधिकारियों को कुछ भी नजर नहीं आता है। इसलिए इस गोरख धंधे से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं। और प्रशासनिक कार्यवाही से बेखौफ होकर अपने गोरख धंधे को लगातार अंजाम दे रहे।




