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पीएम मोदी और शी ने सीमा पार आतंकवाद पर की चर्चा, चीन ने भारत को दिया समर्थन

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा विशेष रूप से उठाया.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में बताया कि यह समस्या केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन के लिए भी गंभीर चुनौती है. इसीलिए इस मोर्चे पर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग और समझ विकसित करना ज़रूरी है. मिस्री के अनुसार, बीजिंग ने इस विषय पर भारत को सहयोग देने का आश्वासन दिया है.

विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से निपटने को प्राथमिकता बताया और स्पष्ट किया कि इस समस्या का सामना करने में भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने इस पर खुलकर अपनी बात रखी और चीनी पक्ष ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी.

ट्रंप के टैरिफ पर चर्चा

पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या मोदी-शी मुलाकात में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ पर भी बात हुई, तो मिस्री ने बताया कि दोनों नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मौजूदा हालात के प्रभाव पर विचार किया. हालांकि, बातचीत का मुख्य फोकस भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध ही रहा. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि चुनौतियों के बावजूद आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग को आगे बढ़ाना चाहिए.

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारतीय आयातों पर 50% और चीनी उत्पादों पर 30% शुल्क लगाया है. भारत पर यह अतिरिक्त दबाव खासकर रूसी तेल खरीद को लेकर बनाया गया, जबकि चीन को इस छूट मिली है.

सीधी उड़ानों पर प्रगति

मिस्री ने आगे बताया कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें जल्द ही बहाल होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर बनी सहमति के बाद नागरिक उड्डयन अधिकारियों के बीच विस्तृत बातचीत चल रही है. हाल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बीजिंग यात्रा ने इस दिशा में गति दी है. अब केवल कुछ परिचालन संबंधी मुद्दे बाकी हैं, जिन्हें आने वाले हफ्तों में सुलझा लिया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी ने भी मुलाकात में इस विषय को उल्लेखित किया.

भारत-चीन व्यापार घाटा

व्यापार घाटे पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने स्वीकार किया कि यह अभी भी काफी बड़ा है और लंबे समय से चिंता का विषय रहा है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच भी चर्चा हुई थी.

मिस्री ने कहा कि व्यापार घाटे में कमी लाने से न केवल आर्थिक संतुलन सुधरेगा, बल्कि यह दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक धारणा बनाने में भी मदद करेगा. उनके अनुसार, यह बातचीत सरकारी स्तर से लेकर कारोबारी संस्थाओं तक कई स्तरों पर चल रही है.

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