ईरान पर हमले से पहले अमेरिकी सेना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मतभेद की खबरें सुर्खियों में रही थीं। अमेरिकी आर्मी में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ईरान पर हमले से जुड़े कई खतरों के बारे में चेतावनी दी थी।
अब जनरल डैन केन की बात सही साबित होती दिख रही है और ईरान को हल्के में लेना भारी पड़ता नजर आ रहा है। इस बीच, ट्रंप ने कूटनीतिक तौर पर चीन को युद्ध में शामिल करने की कोशिश की है। इसके बदले में उन्होंने ड्रैगन को एक बड़ा ऑफर भी दिया है।
दरअसल, ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जाम हो चुका है, यहां भारत समेत कई देशों के शिप फंसे हुए हैं। ईरान का दावा है कि हॉर्मुज उसके कंट्रोल में है। इस बीच, ट्रंप ने चीन और उन देशों को इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा है, जो इस इलाके का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘अगर ईरान कुछ ऐसा करता है जिससे होर्मुज स्ट्रेट में तेल का बहाव रुक जाता है, तो अमेरिका उन पर अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज़्यादा ज़ोरदार हमला करेगा। इसके अलावा, हम ऐसे टारगेट को खत्म कर देंगे जिन्हें आसानी से खत्म किया जा सकता है, जिससे ईरान के लिए एक देश के तौर पर फिर से खड़ा होना लगभग नामुमकिन हो जाएगा — मौत, आग और गुस्सा उन पर राज करेगा — लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ, और प्रार्थना करता हूँ, कि ऐसा न हो! यह अमेरिका की तरफ से चीन और उन सभी देशों के लिए एक तोहफ़ा है जो होर्मुज स्ट्रेट का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं। उम्मीद है, यह एक ऐसा काम है जिसकी बहुत तारीफ़ की जाएगी। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद!’
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग है, जहां से प्रतिदिन लगभग 20% वैश्विक तेल और बड़ी मात्रा में LNG गुजरती है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से ज्यादातर खाड़ी देशों सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत, कतर और ईरान तेल निर्यात करते हैं और चीन इस मार्ग से आने वाले तेल का कुल 37.7 फीसदी यानी सबसे बड़ा खरीदार देश है। यहां से ड्रैगन लगभग 5.4 मिलियन बैरल तेल रोजाना आयात करता है, जबकि भारत, जापान, साउथ कोरिया और अन्य एशियाई देशों को तेल जाता है। ऐसे में अमेरिका चीन को हॉर्मुज पर कंट्रोल करने का ऑफर दे रहा है।
रि० जन सेवा भारत न्यूज़ चैनल सम्पादक श्री मुहीत चौधरी



